Wednesday, October 9, 2019

वाहन की सस्पेंशन सिस्टम - Suspension Systems of Vehicles

आज हम आपको इस आर्टिकल में “Suspension Systems of Vehicles” के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। सस्पेंशन सिस्टम यह वाहन का एक मुख्य हिस्सा है। यह हर वाहन में होता है क्योंकि किसी भी प्रकार के झटके से बचाने के लिए इसे वाहन में लगाया जाता है। यदि आप निलंबन प्रणाली से संबंधित अधिक जानकारी चाहते हैं, तो इस लेख को अंत तक पढ़ें।



वाहन की सस्पेंशन सिस्टम


इस लेख में, हम जानेंगे कि एक वाहन में सस्पेंशन का उपयोग क्यों किया जाता है। और यह वाहन के किस भाग में स्थित है? इसके अलावा, निलंबन प्रणाली (सस्पेंशन सिस्टम) के प्रकार क्या हैं और इसमें कितने स्प्रिंग्स का उपयोग किया जाता है, साथ ही निलंबन प्रणाली से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी इस लेख के माध्यम से हिंदी में प्रस्तुत की जा रही है। खुशी है कि आप सभी पाठकों को यह लेख पसंद आएगा।

प्रत्येक वाहन में चेसिस और वाहन निकाय की सुरक्षा के लिए सस्पेंशन सिस्टम का उपयोग किया जाता है। क्योंकि वाहन में कोई भी झटका समस्या पैदा कर सकता है। यह वाहन के चेसिस या शरीर के अंगों की खराबी का कारण बन सकता है। ऐसी समस्याओं से बचने के लिए, वाहन में शॉक एब्जॉर्बर लगाए जाते हैं। चलिए आगे जानते हैं कि क्या है सस्पेंशन सिस्टम इसकी पूरी जानकारी।

सस्पेंशन सिस्टम क्या है - What is the suspension system 


जो लोग वाहन चलाते हैं या जिन्होंने किसी भी दोपहिया या चार पहिया वाहनों में यात्रा की है, उन्होंने इस तथ्य का अनुभव किया होगा कि जब वाहन चल रहा होता है, तो वह विभिन्न स्थानों जैसे पहाड़ी स्थानों पर वाहन चलाते समय चलता है। इसलिए, वाहन चलाते समय वाहन के पहिये कभी भी वाहन के चेसिस से नहीं टकराते हैं, जिससे वाहन में रहने वाले या चालक को कम झटका लगता है। इसका एकमात्र कारण पहिया ड्रम और वाहन के चेसिस के बीच वाहन में स्थापित निलंबन प्रणाली है, ताकि वाहन बिना झटका दिए किसी भी सड़क मार्ग पर आसानी से चले।

किसी भी असमान सड़क पर, वाहन को चलते समय छोटे गड्ढों से गुजरना पड़ता है, जिससे वाहन को किसी भी प्रकार का नुकसान हो सकता है, इसलिए वाहन में निलंबन का उपयोग किया जाता है। लेकिन मुख्य रूप से निलंबन प्रणालियों में लीफ स्प्रिंग और कॉइल स्प्रिंग का उपयोग किए जाते हैं। लीफ स्प्रिंग यह सड़क में बड़े धक्कों द्वारा घिस जाता है लेकिन यह आसानी से सड़क के छोटे झटके सहन कर लेता है। इससे वाहन के स्टीयरिंग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है जिससे वाहन आसानी से चलाया जा सकता है। वाहन की सस्पेंशन सिस्टम में मुख्य तीन प्रकार के स्प्रिंग्स का उपयोग किया जाता है। हम उनके बारे में आगे जानेंगे।


स्प्रिंग्स के प्रकार (Types of springs)

  1. कॉइल स्प्रिंग 
  2. टॉर्शन बार स्प्रिंग 
  3. लीफ स्प्रिंग 
वाहन के निलंबन प्रणाली के लिए उपरोक्त सभी स्प्रिंग्स आवश्यक हैं। लेकिन इनमे मुख्य रूप से कॉइल स्प्रिंग और लिफ़ स्प्रिंग में का उपयोग किया जाता है। क्योकी टॉरशन बार स्प्रिंग का उपयोग ज्यादातर उच्च स्तरीय कारों में ही किया जाता है।


कॉइल स्प्रिंग (coil spring)



वाहन में कॉइल स्प्रिंग बहुत महत्वपूर्ण है। यह स्टील मेटल से बना है। इसलिए कॉइल स्प्रिंग में जमा ताकत स्टील स्प्रिंग की तुलना में दोगुनी है। कॉइल स्प्रिंग के माध्यम से शीअर स्ट्रेसेस और बेन्डिंग स्ट्रेसेस को सहन किया जाता है। लेकिन यह साइड-साइड थ्रस्ट का सामना नहीं कर सकता। निलंबन में कॉइल के उपयोग से सड़क निलंबन को आसानी से रोका जाता है। इसके अलावा कॉइल स्प्रिंग का उपयोग वाहन के वजन को कम कर सकता है और कॉइल स्प्रिंग को छोटे स्थानों पर लगाया जा सकता है।

टॉर्शन बार स्प्रिंग (torsion bar spring)


टॉर्शन बार यह स्प्रिंग के माध्यम से बनाया जाता है इसका एक भाग कपलिंग के माध्यम से लोअर कंट्रोल आर्म से जुड़े होते है और दुसरा भाग ऐंकर के माध्यम से फ्रेम क्रॉस मेम्बर से जुडी होती है। इस प्रकार के सस्पेंशन में गाडी की एखादी पहिया गहरे गड्डे में जाने के बाद लोअर कंट्रोल आर्म के साथ ट्विस्ट किया जाता है और पहिया पूर्वस्थिति में आते ही टॉर्शन बार भी पूर्वस्थिति में आ जाता है। टॉर्शन बार सस्पेंशन का उपयोग एम्बेसडर कार में किया जाता है।

लीफ स्प्रिंग (Leaf spring)


लीफ स्प्रिंग का उपयोग वाहन में बीम की तरह किया जाता है। इसमें एक आय होल किया जाता है उसे मेन लीफ कहा जाता है। मेन लीफ पर लगी हुई पट्टिया कम कम आकर के होते जाते है यह पट्टिया स्टैप या क्लैंप के माध्यम से बंधे होते है। पट्टिया आगे पीछे न हो इसलिए यह सेंटर बेल्ट के माध्यम से जुड़े होते है। लीफ स्प्रिंग वाहन पर लगाते समय एक टोक फ्रेम के साथ टाईट किया जाता है। इसलिए सस्पेंशन करते समय इस स्प्रिंग की लम्बाई कम ज्यादा होने में मदत होती है। लीफ स्प्रिंग एक्सल पर "यु" बोल्ट के माध्यम से लगाया जाता है। लीफ स्प्रिंग में विभिन्न प्रकार की स्प्रिंग होते है जैसे, क्वार्टर इलिप्टिकल स्प्रिंग, सेमी क्वार्टर इलिप्टिकल स्प्रिंग, थ्री क्वार्टर इलिप्टिकल स्प्रिंग, कैंटीलिव्हर स्प्रिंग, फुल इलिप्टिकल स्प्रिंग, ट्रान्सव्हर्स स्प्रिंग, फ्लैट स्प्रिंग इत्यादि।


सस्पेंशन सिस्टम के प्रकार (Type of suspension system)


वाहन के अनुसर सस्पेंशन सिस्टम के भी तिन ही प्रकार होते है वह निम्नलिखित है।
  1. मैकेनिकल शॉक अब्सॉर्बेर
  2. हाइड्रोलिक शॉक अब्सॉर्बेर
  3. टेलीस्कोपिक शॉक अब्सॉर्बेर

मैकेनिकल शॉक अब्सॉर्बेर (Mechanical shock absorber)


इस तरह का सस्पेंशन फ्रिक्शन मेटेरिअल से या फायबर चकता सेंटर शाफ़्ट पर स्टील प्लेट के चकता के बिच लगाकर उसपर स्प्रिंग टेंशन एडजेस्ट किया होता है। शॉक ऐब्सोर्बर का शाफ़्ट आर्म्स के माध्यम से व्हील एक्सल से जुड़ा होता है। इसलिए रस्ते पर आने वाले गड्डो का पहिये पर असर होने से या चकता एकदूसरे पर घिसकर झटके जा असर कम किया जाता है। इसी को मैकेनिकल शॉक ऐब्सोर्बर कहा जाता है।

हाइड्रोलिक शॉक अब्सॉर्बेर (Hydraulic shock absorber)


हायड्रोलिक शॉक अब्सॉर्बेर यह एक आधुनिक प्रकार का अब्सॉर्बेर है यह ज्यादातर दो पहिया वाहनों उपयोग किया जाता है। जब वाहन का पहिया एखादी जमीं के ऊँचे भाग पर जाता है तब यह लोअर कंट्रोल आर्म के साथ अब्सॉर्बेर की रिझर्वायर ट्यूब के निचे दब जाती है इसीकारण ट्यूब के फ्ल्युएड पर दबाव निर्माण होकर फ्ल्युएड पिस्टन व्हाल्व्ह के ऊपर जाता है लेकिन पिस्टन रॉड का आकार कम होने से फ्ल्युइड पिस्टन व्हाल्व्ह के ऊपर जाते हुए सिलिंडर ट्यूब दबाव निर्माण करता है और इससे शॉक अब्सॉर्बेर किया जाता है। इसे "हाइड्रोलिक शॉक अब्सॉर्बेर" काहा जाता है। हाइड्रोलिक शॉक अब्सॉर्बेर में भी अलग अलग प्रकार है जैसे व्हेन टाइप, सिंगल एक्टिंग पिस्टन टाइप, डबल एक्टिंग पिस्टन टाइप इत्यादि।

टेलीस्कोपिक शॉक अब्सॉर्बेर (Telescopic shock absorber)


यह अब्सॉर्बेर फ्ल्युएड की मदत से चलाया जाता है इसमें एक रिझर्वायर ट्यूब होता है और ट्यूब के निचे से एक आय ब्रैकेट होता है। रिझर्वायर ट्यूब के अन्दर एक सिलिंडर ट्यूब होता है और उसके निचे एक टू वे व्हाल्व्ह लगाया जाता है जिससे सिलिंडर ट्यूब में पिस्टन रोड की मदत से पिस्टन पर एक दुसरा टू वे व्हाल्व्ह होता है और रोड के उपरी भाग से एक आय ब्रैकेट या माउंटिंग दिया जाता है और सिलिंडर ट्यूब को ऊपर से सिल किया जाता है।

रिझर्वायर ट्यूब और सिलिंडर ट्यूब में दबाव निर्माण करके उसमे फ्ल्युएड भरा जाता है। जब पहिया ऊँचे भाग पर जाता है तब यह लोअर कंट्रोल आर्म के साथ शॉक अब्सॉर्बेर का रिझर्वायर ट्यूब दब जाता है। इसीकारण सिलिंडर ट्यूब के फ्ल्युएड पर दबाव तैयार होकर फ्ल्युएड पिस्टन व्हाल्व्ह के उपरी भाग में जाता है लेकिन पिस्टन पिस्टन व्हाल्व्ह की पिस्टन रोड के कारण सिलिंडर ट्यूब का आकार कम होने से फ्ल्युइड पिस्टन व्हाल्व्ह से होते हुए व्हाल्व्ह के ऊपर जाते हुए सिलिंडर ट्यूब दबाव निर्माण करता है और इससे शॉक अब्सॉर्बेर किया जाता है। इस तरह के अब्सॉर्बेर को "टेलीस्कोपिक शॉक अब्सॉर्बेर (Telescopic shock absorber)" कहा जाता है।

उपरोक्त सभी सस्पेंशन सिस्टम वाहन की उपयोगिता के अनुसार अलग-अलग उपयोग किए जाते हैं। इसलिए सभी सस्पेंशन सिस्टम को अलग-अलग नाम दिए गए हैं।


अनमोल शब्द

प्रिय पाठकों, हमें खुशी है कि यह लेख "वाहनों की सस्पेंशन सिस्टम" सभी के लिए उपयोगी साबित हुआ है। इसके अलावा, यदि किसी के पास इस लेख से संबंधित कोई प्रश्न है, तो वे हमें टिप्पणी कर सकते हैं। अगर आपको यह लेख पसंद आया है, तो इसे अपने परिचितों और सहपाठियों के साथ साझा करें।

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