Sunday, June 2, 2019

दुनिया में चाय के रोमांचक सफर के बारे में जानें - Learn about the exciting journey of tea in the world.

चाय पत्ती की खोज कैसे हुई. ( How to find tea leaf.) भारत में चाय की यात्रा कैसे शुरू हुई?

( How did tea travel in India begin? ) देश में चाय का विकास कैसे हुआ. ( How tea was developed in the country. ) चाय पीने के फायदे और नुकसान क्या हैं. ( What are the advantages and disadvantages of drinking tea.)

दुनिया में चाय के रोमांचक सफर के बारे में जानें


आज हम इस लेख में आपको चाय पत्ती की खोज कैसे हुई इसके बारे में बताने जा रहे है. किस तरह चाय का सफर भारत में हुआ? चाय पीने के फायदे और नुकसान क्या हैं. ( What are the advantages and disadvantages of drinking tea.) यह सभी जानकारी जानने के लिए आपको इस लेख को अंत तक पढ़े.

आज मेरे प्रिय मित्र का विषय चाय (Tea) है। यह पेय हम सभी के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. ज्यादातर भारतीय चाय का सेवन करते हैं. इसीलिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि चाय की शुरुआत कैसे  हुई और इसके जन्मदाता कौन हैं.

अगर आपको सुबह का अखबार पढ़ते हुए एक कप चाय मिलती है, तो चाय की चुस्कियों में अखबार पढ़ने का आनंद ही अलग है. भारत में चाय को एक संस्कृति के रूप में भी माना जाता है. क्योकि हमारे घर में जब भी कोई मेहमान आते है तो हम सबसे पहले उन्हें चाय के लिए पूछते है. भारत में, चाय एक ढाबे से लेकर पाँच सितारा होटलों तक उपलब्ध होती है. चीन में चाय को स्वागत पेय ( Welcom Drink ) के रूप में जाना जाता है.  जापान में चाय को चाय समारोह ( Tea ceremony ) के रूप में जाना जाता है.


दुनिया में चाय की खोज ( Tea search in the world )

www.indiandewwa.com

दुनिया में चाय की उत्पत्ति पहली बार चीन से हुई. यह बात ई.सन 2737 साल पहले की है. एक दिन चीन के शैन नुंग, सम्राट बगीचे में बैठे थे. उनके दासों ने एक कप गर्म पानी रखा और उसी समय कुछ सूखी पत्तियाँ हवा से उड़ती हुई आईं और उस कप में गिर गईं और उस पानी का रंग बदल गया और इसे पीने पर एक नया स्वाद पैदा हुआ. वह स्वाद बहुत ही स्वादिष्ट था और तब से चाय का सफर शुरू हुआ. ई.सन  1610 में व्यापारी इसे यूरोप ले गये और यह पूरी दुनिया में पसंदीदा पेय के रूप में जाना जाता है.

भारत में चाय का सफर और विकास - Tea Travel and Development in India

भारत में चाय का उत्पादन भारत के उत्तर पूर्वी हिस्से में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा शुरू किया गया था. उस समय भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड बैटिंक ने 1834 में भारत में चाय की परंपरा शुरू की थी और इसके लिए एक समिति का गठन किया गया था. ईस्ट इंडिया कंपनी के कर्मचारी 'रॉबर्ट ब्रूस' और उनके भाई 'चार्ल्स' ने पौधों को देखने के बाद यह जानकारी दी, यह एक चाय का पौधा है. दरअसल, असम क्षेत्र के हिस्से में पाए जाने वाले 'रॉबर्ट ब्रूस' ने चाय की पैदावार बढ़ाने का दावा किया था.इसके लिए नर्सरी की स्थापना की गई और बाद में चीन से 80,000 चाय के बीज लाए गए.

भारत में चाय उत्पादन क्षेत्र - Tea production area in India

चाय के पौधो की आयु लगभग 100 वर्ष की होती है. वे नीम के पेड़ जितने बड़े होते हैं और उनकी जड़ें इतनी मजबूत हैं कि उन्हें उखाड़ना मुश्किल है.

www.indiandewwa.com


चाय उत्पादन के निम्नलिखित क्षेत्र
  • दार्जिलिंग ( पश्चिम बंगाल ) - Darjeeling (West Bengal)

पश्चिम बंगाल में स्थित, दार्जिलिंग एक प्रसिद्ध हिल स्टेशन है और दुनिया भर में अपनी चाय के लिए प्रसिद्ध है. दार्जिलिंग में चीनी किस्मों के पौधे से चाय का उत्पादन किया जा रहा है. यह कार्य सन 1841 से कार्यरत है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में दार्जिलिंग चाय की बड़ी कीमत है. कस्तूरी (musketer ) के स्वाद के कारण, इसका उत्पादन दार्जिलिंग के अलावा और किसी भी जगह पर उत्पादन नहीं किया जा सकता है. भारत में लगभग 25% चाय का उत्पादन दार्जिलिंग में होता है.
  • असम -  Assam

 असम यह भारत का सबसे बड़ा चाय उत्पादन राज्य है. असम राज्य में स्थित जोरहाट को अक्सर 'विश्व चाय की राजधानी' जाना जाता है. आसाम से चाय का सबसे बड़ा चाय के विशेष अनुसंधान केंद्र (Special Research center Of Tea)  के नाम से मशहूर है, यह जोरहाट में टोकालाई पर स्थित है और  चाय अनुसंधान का प्रबंधन एसोसिएशन द्वारा किया जाता है. चीन के अलावा, असम एक ऐसा राज्य है जो अपने पैदाईस पौधे उगाता है. समतल भूमि पर चाय का उत्पादन लेने के लिए असम प्रख्यात है. असम की चाय अपने अनोखे स्वाद के लिए प्रसिद्ध है.
  • कांगड़ा - Kangada

 कांगड़ा यह हिमाचल प्रदेश में स्थित है. सन 1829 में डॉ. जेमेसन द्वारा चाय उगाने की शुरवात की गयी थी. अधिकांश रूप से यह क्षेत्र Green Tea, Black Tea के उत्तम स्वाद के कारण प्रसिद्ध है.
  • निलगिरी -Nilagiri 

नीलगिरी का नाम सुनते ही आप सभी समझ गए होंगे कि इस नाम को नीलगिरि पर्वत पर रखा गया है. निलगिरी पर्वत को यह नाम नीले फूलों के कारण यह नाम विरासत में मिला है.यह नीला फूल 12 साल में एक बार खिलता है. इसकी खुशबू असाधारण होती है और स्वाद सबसे उत्तम होता है, जो की एक मलाईदार स्वाद प्रदान करता है.
  • कर्नाटक - Karnataka

कर्नाटक दक्षिण भारत का राज्य है। कर्नाटक में कई खूबसूरत पर्यटन स्थल हैं.कर्नाटक में सह्याद्री पर्वत में, चिकमबोर में बाबा बूडम हिल्स के पास ही चाय के  बागान स्थित है. यहाँ चाय की अच्छी पैदावार की जाती है. कर्नाटक की चाय में एक खास बात यह है कि यह चाय सरल और संतुलित गुणों से भरपूर है और आप इसे दिन में कई बार सेवन कर सकते हैं. यहां की चाय में गोल्डन ओट्स वाइन का उत्पादन होता है और यह एक उच्च गुणवत्ता वाली चाय है.
  • वायनाड - Wayanad

वायनाड में चाय का पहला बागान 1874 में ऑटोरोलोनी घाटी में स्थापित किया गया था. यहां की चाय की एक अलग खुशबू है और यह अपनी खुशबू के लिए प्रसिद्ध है.


चाय पीने के फायदे 

www.indiandewwa.com
  1. चाय से रक्त के प्रवाह में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है.
  2. शरीर को सक्रिय करता है क्योंकि इसमें कैफीन होता है। जो हमारे शरीर के Nervous System को उत्तेजित करता है. इसके कारण शरीर की थकावट दूर होती है.
  3. चाय त्वचा के पराबैंगनी किरणों से बचाती है.
  4. यदि आप बालों में चमक लाना चाहते हैं, तो इसके लिए ग्रीन टी का उपयोग करना होगा  और ग्रीन टी का ऑक्सीडाइज किया जाता है.
  5. चाय आंखों को चमकदार और सुंदर बनाती है.
  6. अधिक शराब पीने, तनाव, एलर्जी के कारण हार्मोन बदल जाते हैं. कैफीन चाय में शरीर के हार्मोन को नियंत्रित करने का कार्य करता है.
  7. मसाला चाय महिलाओं के लिए फायदेमंद है क्योंकि अदरक और दालचीनी मासिक पिरेड के दौरान होने वाले दर्द से छुटकारा दिलाती है.
  8. बिना चीनी वाली काली चाय, पेट की बीमारियों के लिए तथा दिल के लिए फायदेमंद है और पाचन तंत्र की गड़बड़ी को दूर करती है.
  9. चाय पर हुए शोध से पता चला कि जो महिलाएं इसका सेवन करती हैं उनमें स्तन कैंसर और गर्भ कैंसर की संभावना कम होती है.
  10. चाय में एंटीऑक्सिडेंट होने के कारण, उम्र बढ़ने और प्रदूषण के प्रभाव से आजादी दिलाता है.
  11. एक अध्ययन में पाया गया कि जो व्यक्ति लगातार 10 वर्षों तक चाय का सेवन करता है, उसकी हड्डियां, उम्र अन्य जोखिम कारकों के बावजूद भी मजबूत होती है.
  12. जो व्यक्ति दांत, मसूड़ों से पीड़ित है, उसे बिना चीनी की चाय का सेवन करना चाहिए.
  13. चाय फ्लोराइड टैनिन से बनी होती है, यह प्लेग जैसी बीमारी को दूर करती है.

चाय पीने के नुकसान

  1. चाय पीने से पेट पूरी तरह से खराब हो जाता है और पाचन शक्ति प्रक्रिया बिगड़ जाती है. 
  2. गर्मियों के दौरान अधिक चाय पीने से अम्लीय पदार्थों की मात्रा बढ़ जाती है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है.
  3. चाय के अत्यधिक सेवन से भूख की मात्रा कम हो जाती है.
  4. ब्रिटिश मेडिकल जनरल के अनुसार, अत्यधिक चाय पीने से पेट की आंतों पर बहुत प्रभाव पड़ता है.
  5. ज्यादा चाय पीने से हर थोड़ी देर में पेशाब आता है, जिससे शरीर के कई फायदेमंद मिनरल बाहर निकल जाते हैं.
  6. चाय का सेवन ज्यादा करने से इंसान इसका आदि हो जाता है, जिसके कारण चाय ना मिलने पर व्यक्ति को थकान और चिडचिडापन महसूस होता है.

यदि आप हमारी जानकारी को पसंद करते हैं, तो आप इसे अधिक से अधिक साझा करे ताकि हर व्यक्ति इसका लाभ प्राप्त कर सके। यदि इस लेख के तहत कोई सुझाव या प्रश्न है, तो टिप्पणी लिखकर भेजें।

धन्यवाद.

No comments: