Monday, June 10, 2019

जानिए फिशिंग बिजनेस के फायदे - Know the Benefits of Phishing Business

मत्स्य पालन योजना की जानकारी क्या है? (What is the information of fisheries planning?)

मत्स्य पालन के लिए सरकार कितना अनुदान देती है. (How much is the government grants for fisheries.) मछली पालन व्यवसाय से कितना लाभ है?  (How much profit is there from fishery business?) मछली का आहार क्या है और मछली को कौन से रोग होते हैं? (What is the diet of fish and which diseases are there for fish?)

जानिए फिशिंग बिजनेस के फायदे

दोस्तों आज हम आपको इस लेख के माध्यम से मत्स्य पालन के व्यवसाय के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं. मछली योजना क्या है और यह इस योजना का लाभ कैसे उठा सकते है? मत्स्य पालन के लिए तालाब का निर्माण कब करना है. मत्स्य पालन में कौन सी मछली पालना फायदेमंद है?  इस के बारे में पूरी जानकारी जानने के लिए, लेख को अंत तक पढ़ें.

दोस्तों, भारत में मछली खाने वालों की संख्या बढ़ रही है. मछली खाने वालों की संख्या में वृद्धि का कारण मछली में प्रोटीन और कैल्शियम हैं और यह हमारे शरीर के लिए फायदेमंद है. आने वाले वर्षों में मछली उत्पादन में चार गुना वृद्धि होगी. इस कारण से देश में मछली पालन का व्यवसाय तेजी से बढ़ रहा है. मत्स्य पालन का व्यवसाय शुरू करने में कितना खर्च आता है. इस व्यवसाय को लोन के माध्यम से शुरू करने के लिए, सरकार किसान को कितना अनुदान देगी?

केंद्र सरकार और राज्य सरकार संयुक्त रूप से इस योजना को चला रही है. मछली पालन करने वाले किसानों को सरकार 75 प्रतिशत अनुदान देती है. सरकार इसके साथ अधिकतम सुविधाएं प्रदान करती है. किसान इन सुविधाओं के बारे में नहीं जानते हैं, अगर वे जानते हैं तो वह मत्स्य पालन में अपनी रुचि दिखाएंगे.


मत्स्य पालन की जानकारी

आप सभी जानते हैं की सरकारी योजना के लिए एक अलग विभाग या कार्यालय का निर्माण किया गया है. सहायक निदेशक मत्स्य, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मत्स्य विकास कार्यालय इन कार्यालयों से मत्स्य पालन योजना जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.जिला उप निदेशक मत्स्य कार्यालय भी सरकारी पोर्टल से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

मत्स्यपालन योजना

जैसा कि हम आपको शुरुआत में ही बता चुके हैं कि सरकार मत्स्य पालन योजना के लिए 75 प्रतिशत अनुदान देती है. सरकार इस व्यवसाय को बढ़ावा दे रही है, साथ ही किसानों को इस व्यवसाय से बहुत लाभ मिल रहा है. राष्ट्रीय विकास योजना के तहत, गाँव के बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने के लिए  सरकारी भूमि पर एक तालाब दिया जाता है. सरकारी तालाब लाभार्थी के नाम पर 5 से 10 साल के लिए लीज पर दिए जाते हैं. मत्स्य पालन एक हेक्टेयर से शुरू के सकते है. एक हेक्टेयर में 4 से 5 हजार मछली का उत्पादन किया जा सकता है. इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए 70 से 80 हजार रुपये का खर्च आता है.

मछली पालन के लिए तालाब का निर्माण कब करें

बारिश का पानी गिरने से पहले अप्रैल और मई महीने में तालाब निर्माण का काम शुरू किया जाता है. इसी महीने में सरकार द्वारा बनाए गए पुराने तालाब का नवीनीकरण किया जाता है. मछली की अच्छी पैदावार के लिए तालाब के लिए मिट्टी और पानी का होना आवश्यक है. जून के महीने में, बारिश का मौसम शुरू होने से पहले तालाब बनाया जाता है.

मत्स्य पालन में कौन सी मछली उत्पादन के लिए फायदेमंद है?

मत्स्य पालन में मुख्य रूप से छह प्रजातियां हैं. भारत के मेजर कॉर्प में कतला, राहु, नयन ये सभी मछली में आते हैं. विदेशी मेजर कॉर्प्स में सिल्वर कॉर्प, ग्रास कॉर्प और कॉमन कॉर्प का पालन करना फायदेमंद है.

मत्स्य पालन के लिए सरकार द्वारा अनुदान

मत्स्य पालन के लिए केंद्र सरकार 50 प्रतिशत और राज्य सरकार 25 प्रतिशत देती है. कुल मिलाकर सरकार 75 प्रतिशत अनुदान देती है. इस व्यवसाय को करने वाले लाभार्थी की लागत 25 प्रतिशत है. यदि लाभार्थी जमीन का मालिक है, तो बैंक इस व्यवसाय के लिए आसानी से लोन प्रदान करता है. बैंक कैटेगरी के अनुसार सब्सिडी प्रदान करता है. एससी और एसटी वर्ग के लिए 25 प्रतिशत और सामान्य वर्ग के लिए 20 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है. ग्रामीण विभाग के लाभार्थी के पास सब्सिडी का प्रतिशत अधिक होता है और शहरी विभाग के लाभार्थी के लिए सब्सिडी का प्रतिशत कम होता है.


तालाब में मछली का बीज कितना डालें

यदि लाभार्थी  मछली के बीज डालने में प्रशिक्षित है, तो वह मछली के बीज को आसानी से तालाब में डाल सकता है. जिस व्यक्ति को मछली के बीज डालने का अनुभव नहीं है. वह लाभार्थी को यह बताने जा रहा है कि तालाब में बीज कैसे डालें. एक हेक्टेयर पानी में 50 मिमी 10000 और 50 मिमी से कम आप 5000 बड़ी अंगलुकिया डाल सकते हैं.
  • तालाब में देशी, विदेशी 6 प्रकार की मछलियों को कैसे डाला जाए
तालाब में मछलियाँ कुछ इस तरह डाले सिल्वर कॉर्प 10 प्रतिशत, ग्रास कॉर्प 10 प्रतिशत, नयन 15 प्रतिशत, कॉमन कॉर्प 15 प्रतिशत, कटला 20 प्रतिशत, रोहुआ 30 प्रतिशत डाल सकते है. ऐसा करने से हर प्रकार के लाभार्थी मछली पालकर अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं.

मछलियों का आहार 

मत्स्य पालन के लिए मछलियों का आहार महत्वपूर्ण है. मछली को दो तरह का आहार दिया जाता है. एक आहार प्राकृतिक रूप से है, दूसरा पूरक आहार है. दोनों आहार का एक अलग ही महत्व है.
  1. प्राकृतिक आहार 👉  प्राकृतिक आहार इसे कहा जाता है जो स्वयं तालाबों और टांके में तैयार होता है. यह आहार मछलियों के लिए बहुत ही पौष्टिक होता है. इस आहार से मछली बहुत तेजी से बढ़ने लगती है.
  2. पूरक आहार 👉  मछलियों की पूरक आहार के लिए, टैंक और तालाब के किनारे पर गोबर खात रखा जाता है. जैसे ही गोबर सूखना शुरू होता है, छोटे जीव और कीड़े वहां से बाहर आते हैं और तालाब में जाते हैं, फिर उन्हें भोजन के रूप में मछली खाती है.

मछलियों की बिमारी 

क्या आप सभी जानते हैं कि मछली को बीमारी होती है? मछलियों को बीमारी से बचाने के लिए पानी और मिट्टी के नमूनों की पूरी जांच करनी चाहिए. मत्स्य अधिकारी के माध्यम से, वहां के कर्मचारी मिट्टी और पानी के नमूनों की नि: शुल्क जांच करते हैं. जाँच करने का वास्तविक कारण यह है कि मछली पालन के लिए पानी और मिट्टी उपयोगी है या नहीं.

मछली के बिमारी इन सभी फंगस, वर्मिया, प्रोटोजोआ, परजीवी, बैक्टीरिया के कारण होते हैं.नमूनों की जांच के कारण मछली को उपरोक्त बीमारियों से बचाया जा सकता है. लाभार्थी मछली रोगों की तकनीकी जानकारी लेकर जिला कार्यालय से उपचार प्राप्त कर सकता है.

मत्स्य पालन का लाभ 

लाभार्थी मछली पालन करके हर साल लाखों रुपये का कारोबार कर सकता है. इसके अलावा, लाभार्थी को कुछ सरकारी सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं.


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