Wednesday, June 26, 2019

जानिए भारतीय संस्कृति से जुड़े रहस्यमयी और अनोखे गांवों के बारे में - Know about the mysterious and unique villages associated with Indian culture

भारत के अनोखे और रहस्यमय गाँवों का नाम क्या है? अद्वितीय और रहस्यमय गांवों की विशेषता क्या है? जानिए भारत के अनोखे और रहस्यमयी गाँवों के बारे में। (Know about the unique and mysterious villages of India)


जानिए भारतीय संस्कृति से जुड़े रहस्यमयी और अनोखे गांवों के बारे में

मेरे प्रिय पाठकों, आज हम आपके सामने ऐसे लेख प्रस्तुत करने जा रहे हैं जिनके बारे में आपने कभी नहीं पढ़ा होगा। आपने कई रहस्यमय कहानियों के माध्यम से पढ़ा होगा, लेकिन आज हम आपको इस लेख के माध्यम से जीवित एव सच्चे रहस्यमय और अनोखे तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं। यह लेख भारतीय संस्कृति और सभ्यता से संबधित है। यह संस्कृति और सभ्यता शहरों में नहीं देखी जाती है। यदि आप यह सब जानना चाहते हैं, तो आइए इस लेख के माध्यम से उन गांवों का अनुसरण करें जिन्होंने वर्षों से अपनी पुरानी संस्कृति को बनाए रखा है। यह सब जानकारी जानने के लिए कृपया इस लेख को पढ़ें।

साहित्य, ज्ञान के विकास में, एडवांस टेक्नोलॉजी जिसमें यह पूरा गाँव आगे है, हम में से किसी ने भी कल्पना नहीं कीया है। भारत में सभी समुदायों के लोग रहते हैं, कई तरह के धर्म और भाषाएं बोली जाती हैं। देश के यह गांव किसी अजूबे से कम नहीं है जिसका वर्णन हमने अपने लेख में किया है।

 भारत के अनोखे और रहस्यमय गाव 

जहा एक तरफ लोग अपना कीमती सामान तिजोरी में रखते है और दूसरी ओर, एक गाँव ऐसा है जहाँ लोगों का सामान बिना दरवाज़े के मकान में सुरक्षित है। हम सांप जैसे जहरीले जीव को देखकर डरते हैं, लेकिन एक गांव ऐसा भी है, जहां सांपों को पाला जाता है।किसी भी तहसील में इतने करोड़पति नहीं है लेकिन यह ऐसा गाँव है जहाँ 50% से अधिक लोग करोड़पति हैं। देश में  सीसीटीवी, वाईफाई कई शहरों में उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन देश में एक गांव ऐसा है, जहां 24 घंटे सीसीटीवी, वाईफाई और एटीएम उपलब्ध हैं। हम सभी जानते हैं कि अफ्रीकी लोग अफ्रीका में रहते हैं लेकिन भारत में एक गाँव है जहाँ अफ्रीकी लोग रहते हैं।


हम निम्नलिखित गांवों से अधिक जानकारी जानेंगे।

  • शनि शिंगणापुर - ( महाराष्ट्र ) 

शनि शिंगणापुर यह गाँव अहमदनगर जिले में नेवासे तहसील में है और घोड़े गाँव से 5 किमी दुरी पर बसा हुआ है। इस गाँव का प्रसिद्ध मंदिर श्री शनेश्वर देवस्थान है, जो इस गाँव का नाम शनि शिगनापुर के कारण पड़ा है। शनि शिंगणापुर गांव की आबादी 3 हजार के करीब है। यहां की लोकप्रियता यह है कि विश्व प्रसिद्ध शनि देव का मंदिर है। दूसरी लोकप्रियता यह है कि यहां के घरों में दरवाजा नहीं है। इस गांव में किसी भी घर में दरवाजा नहीं है। इन लोगों के घर में अलमारी, सूटकेस आदि नहीं होते हैं, ये लोग अपना कीमती सामान थैले या डिब्बे में रखते हैं। जानवरों से बचने के लिए एक छोटा सा बांस का दरवाजा होता है।

इस गाँव में आने वाले शनि देव के भक्त कभी भी अपने वाहनों को लॉक नहीं करते हैं, चाहे कितना भी बड़ा मेला क्यों न लग रहा हो और इस गाँव से कोई कीमती सामान या वाहन चोरी नहीं हुआ है। शनि शिंगणापुर में पुलिस स्टेशन नहीं है।  यह तो एक अजूबा ही है, जो की खुला सामान रहने पर भी चोरी नहीं होती है और चोर चोरी करले तो इस गाव के बाहर नहीं सकता है। क्यों की गाँव के लोग शनि देव पर श्रद्धा रखते हैं और शनि देव की असीम कृपा गाव वासियों  पर है।

जय शनी देव
  • शेतफल सोलापुर - (महाराष्ट्र )

शेतफल यह गाव सोलापुर जिल्हे में है , यह गाव पुणे शहर से 200 किलोमीटर की दुरी पर है। हम सभी भारतीय संस्कृति के अनुसार, देवी देवता की पूजा करते हैं और जीव जंतुओ की भी पूजा की जाती है, जिनमें से एक कोबरा सांप भी है। शेतफल गाव में हर घर में सांप पाला जाता है। यह दुनिया का एक अजूबा भी है जहां सांप को नहीं मारा जाता, बल्कि बूढ़े और बच्चे उनके साथ खेलते हैं।जिस तरह सामान्य लोग अपने घर में कुत्ते, बिल्ली आदि जानवरों को पालते हैं उसी तरह शेतफल गाव में सांप पाले जाते है।

यह गाँव में सांपो की पूजा की जाती है। स्कूल, कॉलेज, बाजार हर जगह सांप घूमते नजर आते हैं। अब तक ऐसी कोई घटना नहीं हुई है कि सापों ने इस गांव में किसी को नुकसान पहुंचाया हो। इस गांव में घर पक्का हो या कच्चा सांप के रहने की जगह जरूरी होती है।
  • हिवरे बाजार अहमदनगर (महाराष्ट्र )

हिवरे बाजार यह गांव महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के क्षेत्र में आता है। इस गाँव की कुल आबादी लगभग 300 परिवारों की है लेकिन कम से कम 80 से यहाँ करोड़पति है। वर्तमान समय में यह राज्य का अमीर गाँव है। सूखे के कारण 1972 में गाँव की स्थिति दयनीय हो गई। जिसके कारण ग्रामीणों का पलायन शुरू हो गया था। 1990 के दशक में, इस गांव के 90% लोग गरीब थे और पानी का स्तर काफी कम होने लगा था।इस दयनीय स्थिति को देखकर, सरपंच पोपटराव ने 1990 में एक समिति बनाई और कुछ गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से पानी की समस्याओं से निपटने के लिए काम शुरू किया। गांव के लोगों की कड़ी मेहनत और श्रम योगदान के कारण जल स्तर में वृद्धि हुई।

यह गांव घोड़ा बाजार के लिए प्रसिद्ध है। ग्रामीणों ने पानी की समस्या को समझते हुए ऐसी फसल को चुना, जिससे फसल को उगाने के लिए पानी कम लगे और उनका निर्णय सही साबित हो। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में इस गांव की प्रशंसा की और कहा कि पानी की कीमत केवल उन लोगों को ही पता हो सकती है जिन्होंने उसके लिए कई समस्याएं झेली हैं।
  • पूंसरी (गुजरात)

 यह गाँव उत्तर गुजरात के साबरकांठा जिले में स्थित है।पुंसरी गांव को मॉडर्न विलेज के रूप में जाना जाता है। 2011 में, इस गाँव को सर्वश्रेष्ठ गाँव का पुरस्कार दिया गया, तब से यह गांव सुर्खियों में छाया है। इसके पीछे वहा के सरपंच हिमांशु पटेल का अतुलनीय योगदान है। गुजरात का पुसारी गाँव अपनी सुविधाओं के कारण देश के सात लाख गाँवों के लिए आदर्श बन गया है। जो सुविधा एक शहर में उपलब्ध नहीं है, वह इस गांव में है। डिजिटल स्कूल सीसीटीवी, वाई-फाई, सामुदायिक रेडियो, स्वच्छता, गाव की बस सेवा और आरओ पानी संयंत्रों के शहरों को पीछे छोड़ रहा है।
  •  जांबुर (गुजरात )

यह गांव गुजरात के सोमनाथ जिले में 12 किमी की दूरी पर स्थित है। इसकी खासियत यह है कि जैसे ही आप गांव में प्रवेश करते हैं, ऐसा लगता है कि यह अफ्रीका में आ गया है। 200 साल पहले जूनागढ़ के नवाबों ने अफ्रीकी लोगों को लाया गया था। इस गाँव में शेर का आंतक होने के कारण, नवाबों को पता चला कि अफ्रीकी लोग शेरों से डरते नहीं हैं, इसलिए उन्हें इस गाँव में लाया गया है। जांबुर गाव दुसरे अफ्रीका जैसे लगता है।


  •  कुलधरा (राजस्थान) 

यह गाँव जैसलमेर से 18 किलोमीटर दूर है। कुलधरा की कहानी लगभग 200 साल पहले शुरू हुई थी।200 साल पहले यहां कोई खंडहर नहीं था। यह पालीवाल ब्राह्मणों का निवास हुआ करता था। दीदीवान सलीम सिंह के उत्पीड़न के कारण ब्राह्मणों के 84 गांवों को गांव छोड़ना पड़ा। ब्राह्मणों ने गाँव से निकलते समय इस जगह को शाप दिया था की यह गाँव वीरान हो जाएगा और इसमें किसी का भी निवास नहीं होगा।

वैज्ञानिकों द्वारा इस गांव पर रिसर्च किया गया है। वैज्ञानिकों ने जो मशीन लगाई, उसमें ध्वनि की कुछ तरंगें रिकॉर्ड हुई थीं जिससे पता चला कि आज भी वह कुछ शक्तियाँ है। कुलधारा गाँव में ऐसी शक्तियाँ है जैसे ही इस यह में प्रवेश करते  है तो इस क्षेत्र का तापमान 40 डिग्री से अधिक है। गाँव में मोबाइल फोन अपने आप बंद हो जाते हैं। शाम होते ही यह गांव पर्यटकों से खाली हो जाता है। रात में वहां जाने की किसी की हिम्मत नहीं होती है।आज भी, कुलधारा गाव ब्राह्मणों के क्रोध और आत्मसम्मान का प्रतीक है।
  • कोडिन्ही (केरल)

कोडिन्ही गाँव केरल के मलप्पुरम जिले में स्थित है। इस गाँव में मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं।यहां एक प्रकृति अद्वितीय है और यह अजीब है कि यहां हर घर में जुड़वां बच्चे का जन्म होता है। जुड़वाँ बच्चे पैदा होना यहाँ कोई नई बात नहीं है। भारत में यह एक ऐसा गाँव है जहाँ जुड़वा बच्चों की संख्या सबसे अधिक है। यह गाव विश्व स्तर पर दुसरे नंबर पर और एशिया में पहले स्थान पर है। जहां 350 जुड़वां बच्चे देखे जाते हैं और बच्चों से लेकर तो 65 साल के बूढ़ेभी जुड़वा देखने मिलते  हैं।

  • मत्तुरु (कर्नाटक)

 यह गाँव कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले में स्थित है। मत्तुरु गाव में 300 परिवार रहते है और आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि गाँव के सभी लोग संस्कृत भाषा का उपयोग करते हैं। ये लोग अपनी दिनचर्या में संस्कृत भाषा भी बोलते हैं। गाँव में आने वाले पर्यटक आश्चर्य चकित हो जाते हैं, उनके कपड़ों को देखकर चाणक्य के दौर की याद दिलाते हैं।यहां उनके पारंपरिक कपड़े हैं। यह गाँव आधुनिक युग में एक मिसाल बन गया है। इस क्षेत्र का प्रत्येक बच्चा संस्कृत बोलता है, और अंग्रेजी भी बहुत अच्छी बोली जाती है।इस गांव ने आधुनिकता के साथ संस्कृति का तालमेल बनाए रखा है।

छोटे बच्चों से लेकर बूढ़े और बूढ़े भी इस संस्कृति को निभा रहे हैं।ऐसा एक गाँव जो पूरे भारत की संस्कृति को समेटे हुए है।भाषा और पहनावे के साथ-साथ यहां आपको आधुनिकता का मिश्रण देखने को मिलेगा।
  • मावलिनोंग (मेघालय)

 मावलिनॉन्ग गांव मेघालय की राजधानी शिलांग से 90 किलोमीटर दूर है।शिलांग का यह छोटा सा गाँव अपनी सफाई के लिए जाना जाता है। मेवलिंगोंग गाँव की गिनती एशिया के एक साफ़ सुथरे गाँव में होती है।2014 की गणना के अनुसार यहां 95 परिवार रहते हैं। इस गांव में आजीविका के लिए सुपारी की खेती की जाती है।गाँव के लोग खुद गाँव की सफाई करते हैं। यह किसी भी व्यवस्थापक पर निर्भर नहीं रहते है।

इस गांव में पर्यटकों को घूमने के लिए बहुत सारी जगह है। वॉटरफॉल , बार्लिंग चट्टानों, पेड़ की जड़ों से बना पूल सब देखने लायक है। यहां चिकित्सा सुविधा न होने के कारण यहां के लोगों ने गांव को साफ रखने का फैसला किया। स्वच्छ वातावरण के कारण बीमारी दूर भागती है और गांव उसी पदचिह्नों पर चल रहा है।


 
पाठक के लिए कुछ शब्द

हमें उम्मीद है कि आप इस लेख के माध्यम से संस्कृति से जुड़े रहस्यमय गांवों के बारे में जानकर बहुत खुश होंगे। संस्कृति और रहस्यमय गांवों की इस जानकारी को अपने दोस्तों के साथ साझा करें ताकि वे इसे जान सकें। अगर आपको इस लेख के लिए कोई सवाल या सुझाव है तो हमे कमेंट करके बताये। 

धन्यवाद।

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