Saturday, June 16, 2018

महात्मा जोतीराव फुले जी की जीवन प्रक्रिया

महात्मा जोतीराव फुले जी की जीवन प्रक्रिया ,जोतीराव जी शैक्षणिक कार्य ,  अस्पृश्य के लिए किये गए कार्य , किसानो के लिए किये गए कार्य। समाज व लोककल्याण के लिए हमेशा  वह सोचते रहते थे।(१८७३)को गुलामगिरी ये ग्रंथ  उन्होंने प्रसिद्ध किया। और वह पुणे नगरपालिके के सदस्य रह चुके थे। ब्राम्हण के कसब ये भी किताब उन्होंने लिखा था। 
mahaatma jotirao fule ji ki jivan prakriya

महात्मा जोतीराव फुले जी की  जीवन प्रक्रिया  

महाराष्ट्र के शैक्षणिक व सांस्कृतिक का  साठा रखने वाला शहर याने पुणे शहर और इसी पुणे शहर ऐसे महान व्यक्ति ने जन्म लिया है। जिनके किये हुए कार्यो हम कभी भुला नहीं सकते ऐसे महान व्यक्ति महात्मा जोतीराव जी फुले इनका जन्म पुणे शहर में ११ अप्रैल १८२७ रोज बुधवार को हुआ। जोतीराव जी के दादा जी शेटिबा पुणे शहर के कटगुण पास के है जोतीराव जी का मुलगाँव सातारा से है। जोतीराव जी  जात से क्षत्रिय माड़ी थे। जोतीराव जी के दादा जी को तीन पुत्र थे राणो जी , कृष्णा जी व गोविंदाजी

 उनकी घर की परिस्थिति बहुत ही खराब थी तो जोतीराव जी के पिता और उनके चाचा जी ने बकरी चराने का व्यवसाय सुरु किया और वहा के एक धनी व्यक्ति ने इन सब की ईमानदारी देखकर उन्हें फुल का व्यवसाय मिला कर दिया और उन्होंने उस व्यवसाय में अच्छी प्रगति की और तब से उनका उपनाम फुले हो गया।  उनका फुल का अच्छा काम का नाम सुनकर वह के एक पेशवे ने निजी जगह फुल दालने काम दिया और ३५ एकर जमीन इनाम दिया। फिर शेटिबा जी के मृत्यु के बाद उनके बड़े बेटे ने धोके से पूरी जमीन अपने नाम पर कर लिया। गोविंदराव जी की शादी चिमणा बाई के साथ हुई और फिर जोतीराव जी और राजाराम जी का जन्म हुआ। जोतीराव जी एक साल के थे तब उनकी माताजी का देहांत हो गया। गोविंदराव को लग रहा था की जोतीराव जी अच्छे से पढ़े और आगे बड़े करके लिए उन्होंने जोतीराव जी को उन्होंने निजी स्कूल में उनका दाखला किया। जोतीराव जी जिस  वक़्त पढ़ाई कर रहे थे तब लोगो को पढ़ाई के बारे में कुछ जानकारी नहीं थी और वो लोग पढ़ाई के विरूद्ध थे ,और जोतीराव जी के पिताजी को बहोत लोगो ने पढाई के विरूद्ध भड़काया फिर उस कारण के परिणाम का भुगतान जोतीराव जी को स्कूल से निकाल दिया गया। जोतीराव जी का विवाह उम्र के १३ वर्ष में हूई धनकवडी के झगड़े पाटील की पुत्री सावित्री जी के साथ हुआ।

जोतीराव जी का शैक्षणिक कार्य  ➢

 १८४८ में लड़कियों की पहली स्कूल सुरु की गयी। जोतीराव जी ने अपने पत्नी को पढाई करवा कर सावित्री जी को शिक्षिका बना दिया। मेजर कैंडी के द्वारा जोतीराव जी के स्कूल में किताबे दी जाती थी। १८५१ में लड़कियों की तीसरी स्कूल सुरु की गयी। जोतीराव जी ने सभी जात के लड़को को पढ़ाया और उन लड़को के पीछे बहुत मेहनत की जैसे की लिखना ,पढ़ाना और समझाना ये सब उन्होंने किया। जोतीराव जी को लड़कियों के शिक्षण कार्य के लिए  वर्ष १८५२ में उनका सन्मान किया गया। अस्पृश्य के

 अस्पृश्य के लिए किये गए कार्य  ➢

  जोतीराव जी ने १८५२ में अस्पृश्य के लिए वेतालपेठ में स्कूल सुरु की। जोतीराव ने अपने घर का अस्पृश्य के लिए पानी का हौद सुरु कर दिया। धार्मिक व सामाजिक गुलामगिरी से मुक्त होने के लिए जोतीराव ने २४ सप्टेंबर १८७३ में सत्य शोधक समाज की स्थापना की गयी।

 (१ ) हिन्दुस्थान के अध्यन का सवाल रखने के लिए सरकारने १८५२ में नियुक्त किये गए हंटर आयोग के सामने जोतीराव ने शैक्षणिक क्षेत्रो के लिए अपने विचार धारा मँड़ाई और कहा की १२ साल के लड़को को मोफत शिक्षण के बारे में बताया।
 (२ ) भालेकर जी के मदत से 'दिनबंधु 'वृत्तपत्र सुरु किया समाज के अच्छे  कार्य के लिए काम किया।
 (३) जोतीराव ने १८६४ में अपने घर में  " भ्रूणहत्या प्रतिबंधक " ऑफिस सुरु किया और यह ऑफिस भारत का पहला था।

किसानो के लिए किये गए कार्य  ➢

 महाराष्ट्र का किसान बहुत ही गरीब और कर्ज के निचे दबा हुआ रहता। जोतीराव जी का उद्देश ये था की अगर देश का " किसान सुख में है तो देश सुख में है" उसी स्थिति को देखकर जोतीराव जी ने" शेतकरी के आसुड " ये ग्रंथ लिखा और उन्होंने इस ग्रंथ के द्वारा किसानो के बारे में बहुत  बताया है। मुंबई में गिरणी मजदुर पर बहुत ज्यादा ही अत्याचार हो रहा था इस अत्याचार का जवाब देने के लिए जोतीराव जी ने नारायणराव जी के मदत से भारत की पहिली मजदुर संघटना बनाई और उस संघटना का नाम "हैण्ड मील  असोसिएशन "रखा गया।

 जोतीराव जी को मुंबई के जनता ने " महात्मा  " की उपाधी दी गयी और तब से महात्मा कहा जाता है।
जोतीराव  फुले जी ने सभी जनता को न्याय मिलना चाहिए करके जोतीराव जी ने " सार्वजनिक सत्यधर्म " नाम की  पुस्तक लिखी परंतु वह  पुस्तक १८९१ में  उनके मरणोपरांत प्रकाशित हुई है।

२८ नव्हंबर १८९० को जोतीराव जी उम्र के ६३ वे साल में हमे छोड़कर स्वर्ग सीधार गए।

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