Wednesday, June 13, 2018

विनायक दामोदर सावरकर जी का परिचय (१८८३-१९६६ )

विनायक दामोदर जी सावरकर भारत के स्वंतत्रतासैनिक थे और मराठी कवि ,लेखक थे। विनायक जी को स्वंतत्रतावीर की  उपाधी प्रख्यात मराठी लेखक व पत्रकार प्रल्हाद केशव अत्रे इन्होने दी। विनायक सावरकर जी ने कालपानी ये ग्रंथ  भी लिखा और   " माझी जन्मठेप " ये  आत्मचरित्र भी लिखा है।  स्वंतत्रतावीर विनायक सावरकर जी के नाम से कही  पुरूस्कार दिया जाता है। 

vinaayk daamodar saawrkar

विनायक दामोदर सावरकर जी का परिचय  (१८८३-१९६६ )
 भारत के स्वंतत्रता आंदोलन के वीर अग्रिम सेनानी और उच्च कोटि के राष्ट्रवादी के नेता थे। इनका जन्म २८ में १८८३ महाराष्ट्र के भगूर गांव के नाशिक जिल्हे में हुआ था उनके माता का नाम राधाबाई था ओर पिताश्री का नाम दामोदर सावरकर था विनायक जी नौ साल के थे तब उनके गांव में महामारी फ़ैल थी तभी उनकी माता का जी का देहांत हो गया इसके कुछ वर्षो बाद १८९९ में प्लेग की महामारी फ़ैली तो तब वह उनके पिता की मृत्यु हो गयी। विनायक जी के दो भाई थे और एक बहन थी उनके दोनों भाई के नाम गणेश व नारायण दामोदर सावरकर था और बहन का नाम नैनाबाई था। उसके बाद विनायक जी के बड़े भाई के उपर घर की जिम्मेदारी आ गई। विनायक  जी शिवाजी  हाईस्कूल नाशिक से मेट्रिक की परीक्षा पास की। बचपन से ही पढाई में बुद्धिवान थे और उन्होंने कई कविताएं भी लिखी थी। रामचंद्र त्र्यंबक  चिपडूणकर के पुत्री यमुनाबाई के साथ विनायक जी का विवाह १९१० में संपन्न हुआ।

विनायक दामोदर सावरकर के क्रांति कार्य काल  =>
 १ जनवरी १९०० में विनायक सावरकर ने मित्र मेला संगठन की स्थापना की और नवयुवक युवाओ को एकजुट किया  बाद मे १९०४ में मित्र मेला का रूपांतर अभिनव भारत में स्थापना की गयी है।  अभिनव भारत का मुख्यालय नाशिक में है। १९०६ में श्यामजी कृष्ण वर्मा इन्होने इंग्लॅण्ड छत्रपति शिवाजी छात्रवृति सुरु की और इस छात्रवृति की मदत से विनायक सावरकर जी पढ़ने के लिए लन्दन गए।विनायक जी ने क्रांति कार्यो  उत्साह बढ़ाने के लिए उन्होंने इटली के जोसेफ मझिनी चरित्र और १८५७ के स्वातंत्र्य समर इंडियन वॉर ऑफ इंडियंस १८५७ का यह किताब लिखी है लंडन में रहते हुए सावरकर जी मुलाकत लाला हरदयाल जी से हुई जो की उन  दिनों इण्डिया हाउस की देख रेख करते थे। अभिनव भारत संघटने के क्रांति कार्यो में क्रांति की ज्वाला लग गयी थी ब्रिटिश सरकारने विनायक सावरकर  जी के बड़े भाई को गिरफ्तार कर लिया गया था।और नाशिक के जैक्सन नाम के कलेक्टरने उन्हें काले पानी की सजा सुनाई गयी थी। उसके बाद अंनत लक्ष्मण कान्हेरे जो की अभिनव भारत के क्रांति कार्य नेते बने और उन्होंने २१ दिसंबर १९०९ को नाशिक के विजयानंद सिनेमाघर में घुश कर कलेक्टर जैक्सन की हत्या की और उस वक़्त उस सिनेमाघर में देवल नाटक कंपनी के शारदा नाटक चालू था

 १९१० में विनायक सावरकर पेरिस चले गए।  तब उन्हें ब्रिटिश सरकारने विनायक सावरकर जी पेरिस से इंग्लॅण्ड लौट रहे थे तब उन्हें विक्टोरिया स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया गया है। विनायक सावरकर जी को २२ मार्च १९११ में नाशिक कोर्ट ने ५० साल की शिक्षा सुनाई और उन्हें अंदमान के जेल में दाल दिया गया। सन १९२४ में विनायक सावरकर जी को अंदमान जेल से निकालकर रत्नागिरी में गुप्त स्थान में रखा गया था।
 विनायक दामोदर सावरकर जी को हिन्दू शब्द से बहोत ज्यादा लगाव था विनायक सावरकर जी ने जीवन भर हिन्दू और हिन्दुस्थान के लिए ही काम किया है। सावरकर जी ६ बार अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे है। १ फरवरी १९६६ में वीर सावरकर हमे छोड़ कर स्वर्ग सिधार गए थे।

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